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क्यों महारथी कर्ण महाभारत का सबसे महान व्यक्ति था ?

महारथी कर्ण के प्रती हमारा प्रेम जाहीर हे, और इस प्रेम का कारण हे महारथी कर्ण की असामान्य प्रतिभा ! ग्रंथो मे भी यही लिखा हे और इसीकरण लाखो करोडो लोगो कि तरह हम भी इस असामान्य योद्धा को महाभारत का सर्वश्रेष्ठ वीर समझते हे. पर फिर भी कूच लोग कमेंट मे बहोत ज्यादा लिख देते हे… गुमराह करणे कि कोशिशे करते हे…!!

हमे समझ नही आता कैसे कोई कर्ण से नफरत कर सकता हे… जिसे जन्मतेही माता ने त्याग दिया… पुरे जीवनभर उसे उसके भाई ने प्रताडीत किया.. और जब एक योद्धा का सर्वोच्च बिंदू ..युद्ध आता हे, तब उसे युद्ध मे न उतरने पर मजबूर किया गाय और अंत मे उसका छल से वध किया गया…

क्या वो महारथी कर्ण नफरत के लायक हे … हम नही समझते !! महारथी कर्ण उस सुरज कि तरह हे जो महाभारत के समय मे… जहा पाप-पुण्य, सत्य-असत्य कूच समझ मे नही आ रहा था.. उस समय धर्म कि रोशनी फैला रहे थे.

आज के इस लेख मे हम महारथी कर्ण के एक असामान्य व्यक्ती होणे के कुछ कारणों के बारे में चर्चा करेंगे.(वो भी प्रमाणों के साथ) महारथी कर्ण मे ऐसी अनेको खुबिया थी, जीन कारनो से वो सर्वकालीन महान मनुष्यो मे शामिल होता हे… जिसने अनेको भूमिकाओ मे अपने आप को एक आदर्श स्थापित किया हे

१. एक आदर्श पुत्र

रंगभूमीमे जब कर्णने अपनी महान धनुर्विद्या का परिचय दिया तब उठे आक्षेपोके चलते दुर्योधनने कर्णको राजा बना दिया. पर राजा कर्ण ने जब अधिरथ को रंगभूमीमे आता देखा तो कर्ण अधिरथ के पैरो मे पड गया. एक बार कर्ण ने भगवान कृष्णसे अपने माता पिता कि महानता के विषय मे कहा था, कि तीनो लोको का राज्य भी वो अपने माता पिता के लिये छोड सकता हे. भगवान उनके सामने खडे थे फिर भी वो कर्ण ही थे वो उन्हे ना कहने का धैर्य रखते थे.

वैसे तो कर्ण कि जगह दुनिया का कोई भी इन्सान होता तो वो राजमाता कुंतीसे खफा होता पर वो सिर्फ कर्ण हि हो सकता था, जिसने कुंती के चार पुत्रो का जीवन अपनी माता कि झोली मे डाल दिया. कर्ण ने जीवनभर माता कुंती का सम्मान किया

2. एक आदर्श शिष्य

वेड व्यास लिखते हे, कि परशुराम को कर्णसे इतना लगाव हो गया था कि वो सिर्फ कर्ण कि गोद मे सर रखकर सोते थे. भगवान श्रीराम को भी भगवान परशुराम के सामने परीक्षा देनी पडी थी.. वे परशुराम भी इस असाधारण शिष्य को पाकर खुश थे.

Parshuram Karna kahani

और वो कर्ण ही हो सकता था, जो अपने गुरु की निद्रा के लिए डंख को सहन कर सके. एकतरफ वो कर्ण था तो दुसरी और धनुर्धारी अर्जुन… जिसके कारण एकलव्य को अपना अंगुठा खोना पडा

3. एक आदर्श भक्त

भगवान सूर्यने कहा था, की कहन उनका सबसे महान भक्त हे, ऐसा माना जाता हे की छट पूजा की शुरवात कर्णनही करी थी.

4. एक आदर्श पोता

जब पितामहा भीष्म शर शैय्या पर थे, तब कर्ण उनके पास गया… उसकी आँखोंमें पानी था, वो सीधा उनके पैरो में गिर गया… वेद व्यास लिखते हे, की महारथी कर्ण ही सबसे ज्यादा रोये थे और कभी किये गये अपने कटु वचनों के लिए माफ़ी मांगी थी. महारथी कर्ण शायद कभी गलत रहा था, पर अपने बडो के प्रती उसका आदर, एक महान व्यक्ती कि पहचान करणे के लिये काफी हे.

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5. एक आदर्श मित्र

दुनिया मे मित्रता कि अगर कोई मिसाल होगी तो वो कर्ण दुर्योधन की होगी. दुर्योधन एक सूतपुत्र को गले लगाकर, मित्र बनाकर मित्रता की मिसालो में अमर होगया. वही कर्ण ने जिंदगीभर अपने मित्र से मित्रता शिद्दत से निभाई.

कर्ण ने भीष्म, कृष्ण और माता कुंतीसे भी अनेक बार कहा की वो कुछ भी हो… अपने मित्र का साथ नही छोड़ेंगे.. चाहे इसके लिए अपने प्राणो कि आहुती हि क्यो ना देणी पडे.

कमेंट मे आप बताये क्या कर्ण दुर्योधन से अधिक घनिष्ट मित्रता आपने कही देखी हे ? क्या अर्जुन और भगवान कृष्ण की मित्रतासे वो कही भी कम थी ?

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