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पृथ्वी वल्लभ कि संपूर्ण कहाणी | Prithvi Vallabha Real Story

पृथ्वी वल्लभ क्या हे ? पृथ्वी वल्लभ कौन है ? (Who is Prithvi Vallabha)

पृथ्वी वल्लभ का मतलब होता हे पृथ्वी का राजा या फिर पृथ्वी का मालिक !! साधारण तौर पे ये एक Title या उपाधि थी.. जैसे की राजा, महाराजा, सुलतान राजाधिराज इत्यादी.

पर आज हम आपको इसी “पृथ्वी वल्लभ” उपाधि को धारण करने वाले एक राजा की कथा सुनाने वाले हे. जिस पर एक फिल्म बनचुकी हे और लोकप्रिय सिरीयल भी आ चुकी हे

मालवा के राजा मुंज या वाक्पति द्वितीय (पृथ्वी वल्लभ) /Parmar King Vakpati II

साल था सन ९७२,
मालवा प्रान्त (सातपुड़ा पर्वत के ऊपर का मैदानी प्रदेश जो वर्तमन मध्यप्रदेश के इन्दोर के नजदीकी का प्रदेश हे ) इस मालवा में मुंज नाम का राजा राज कर रहा था. इस मुंज को इतिहास वाक्पति द्वितीय के नाम से जानता हे. परमार वंश का ये राजा अपने अच्छे कामो के कारन अपने प्रजाजनों में काफी लोकप्रिय था. प्रजा में साथ होने के साथ ही राजा मुंज अपनी सेना के दम पर उसने हून, कलाचारी राज्य के साथ गुर्जर राजाओ को भी परमारों की तलवार की धार दिखा थी….

पश्चिमी चालुक्य राजाओ का इतिहास (History Of Western Chalukya)

मालवा के परमार राज्य की सीमाये, पश्चिम मे चालुक्य राज्य से सटी हुयी थी. वैसे तो चालुक्य राजघराना भारत के अतिप्राचीन राजघरानो मेसे एक था. पर इन चालुक्य राजाओ को इतिहास में सुलभता हो इस कारन पश्चिमी चालुक्य राज्य कहा जाता हे. चालुक्य राजघराना काफी प्राचीन वंश था, और शुरवात मे उसकी राजधानी कर्नाटक में स्थित बदामी या आज कि हम्पी थी. पर जैसे ही महाराष्ट्र में राष्ट्र्कुट सत्ता का उदय हुवा और राष्ट्रकूट राजघराने के उत्कर्ष के साथ चालुक्य इनके अधीन चले गये.

अगले २०० साल चालुक्य एक छोटासा राजघराना बनकर रहे. पर जैसे ही राष्ट्रकूट सत्ता का विलय होने लगा. चालुक्य वंश के कुछ लोगो ने गुजरात में राज्य बना लिया और इसे शक्तिशाली बना लिया. इसी पश्चिम में बनाए राज्य को पश्चिमी चालुक्य कहते हे तो कुछ वंशजो ने पूर्व में राज्य बना लिया जिनका राज्य तेलंगण और उन्हे पूर्व के चालुक्य कहा जाता हे.

चालुक्य राजा तैलप (Chalukya King Tailapa)

साल था 920, उस वक्त पश्चिम चालुक्य घराने का राजा था तैलप द्वितीय. परमार और चालुक्य घराने की काफी बार लडाईया हुयी थी. परमार राजा पृथ्वी वल्लभ मुंज वीर राजा था पर फिर भी मुंज ने हर बार तैलप को परास्त किया था.

कहानियो में कहा जाता हे कि पृथ्वी वल्लभ मुंज ने १६ बार तैलप को हराया था. पर फिर भी पृथ्वी वल्लभ मुंज अपने इस शत्रु को पूरी तरह से परास्त करने में या उसका राज्य छीनने मे नाकाम रहा था. दूसरी तरफ तैलप प्रतिशोध की अग्नि में तडप रहा था. तब उसने देवगिरी के यादव राजा भिल्लम द्वितीय से गठजोड़ बनाली.

मुंज और तैलप की लड़ाई (Munja Vs Tailap)

महाराजा मुंज भी तैलप को पूरी तरह से ख़त्म करना चाहता था, और इसी कारन मुंज पहली बार गोदावरी के दक्षिण मे उतारा उसने गोदावरी नदी को पार कर दक्षिण में सेना उतारी. ये प्रदेश तैलप और भिल्लम का था, मुंज इस प्रदेश से जाना पहचाना नहीं था. उसने तैलप और भिल्लम को हराया था पर एकसाथ ये दोनों कितने घटक हो सकते हे इस बात का उसको अंदाजा नहीं था.

दूसरी तरफ यादव और चालुक्यो की मिलीजुली ताकद अब काफी बढ़ चुकी थी. और लड़ाई भी उनके क्षेत्र में हो रही थी. गोदावरी के निचे के प्रदेश यांनी महाराष्ट्र में हुयी लड़ाई में पृथ्वी वल्लभ मुंज हार बुरी तरह से हार जाता हे, और साथ ही तैलप उसे बंदी बना लेता हे.

कहानी में ट्विस्ट !! रणसंग्राम बना प्रेमसंग्राम (War became Love)

यहाँ कहानी एक अलग ही मोड़ लेती हे. तैलप की जोगन बहन मृणालवती जो पहले मुंज से नफरत करती थी, उसके खून कि प्यासी थी.

वो पृथ्वी वल्लभ मुंज के प्रेम में पड जाती हे, मुंज भी अपना दिल मृणालवती को दे बताता हे, दोनों प्यार में कुछ भी करने के लिए तैयार थे. उधर परमार राज्य भी अपने राजा को छुड़ाने के लिए कुछ भी कर सकता था, वे अपने राज्य के चुनिन्दा बेहतरीन योद्धा तैलप के राज्य में भेज देते हे. वे योद्धा किसी तरह से मुंज संपर्क करते हे, और उसे छुड़ाने का एक बेहतरीन plan भी बनाते हे. पर राजा मुंज प्यार में पागल हो चूका था, वो मृणालवती को अपने साथ अपने राज्य ले जाना चाहता हे. और इसी खातिर वो पूरी योजना अपनी सखी मृणालवती को बता देता हे.

मृनालवती जो मुंज के प्राणो कि प्यासी थी मुंज को अपने प्राणो से ज्यादा प्रेम करणे लागती हे

यहाँ कहानी में अलग मोड़ आता हे. मृणालवती राजा मुंज से प्यार तो करती थी पर उसका साथ देने की बजाय, वो पूरी योजना अपने भाई तैलप को बता देती हे. तैलप राज्य में घुसे बहोतसे परमार योद्धाओ को खोजकर मार डालता हे. और, राजशिष्टाचार की सारी हदे तोड़कर वो राजा मुंज से सारे शहर में भिक्षा मंगवाता हे, इतना होने के बाद भी उसका मन नहीं भरता तो वो बड़ी क्रूरतापूर्वक पृथ्वी वल्लभ मुंज की हत्या करता हे.

महाराजाधिराज भोज का उदय (Rise Of King Bhoja)

मुंज के बाद में उनका भतीजा राजा भोज परमार राज्य का राजा बनते हे. भोज भारत के सर्वकालीन महान राजाओ मे से एक हे और उनके नाम पर ही वर्तमान मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल बनी हे. महाराजा भोज ने अपने जीवनकालमें काफी लोककल्याण के काम किये और अपने चाचा मुंज की तरह जितका सिलसिला कायम रखा और परमारों को बड़ी बड़ी लड़ाईया जीताई.

महाराज भोज के नामपर ही भोपाल शहर बसा हे. और भोपाल का प्रसिद्ध भोज सरोवर भी महाराज भोज के नामपर ही बना हे.

लोकप्रिय साहित्य में पृथ्वी वल्लभ (Prithvi Vallabha in Popular Literature)

कन्हैयालाल मानिकलाल मुंशी (KM Munshi) भारत के सर्वकालीन महान लेखको मेसे एक. मुंशीजी ने १९२० में “पृथ्वी वल्लभ” नाम की एक किताब लिखी थी. लेखक के आलावा मुंशीजी एक स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और वकील थे.

मुंशीजी की लिखी हुई कहानी का नायक पृथ्वी वल्लभ मुंज जम्मू कश्मीर की प्राचीन नगरी अवन्तिपुर का राजा था. अवन्तिपुर का पडोसी राज्य था, मान्यखेत और इस राज्य का राजा था तैलप. इतिहास की ही तरह तैलप एक अन्य राजा और अपनी बहन मृनालवती की मदतसे पृथ्वी वल्लभ को बंदी बनाकर मार देता हे.

टीवी और सिनेमा में पृथ्वी वल्लभ (Media and Prithvi Vallabha)

सोहराब मोदी और दुर्गा खोटे की पृथ्वी वल्लभ (1943 Movie)

1943 में सोहराब मोदीने इस नोवल पर एक फिल्म बनाई थी. इस फिल्म में मुंज के किरदार में खुद सोहराब मोदी दिखे तो मृनालवती का किरदार अभिनेत्री दुर्गा खोते ने निभाया था. तैलप के किरदार में संकठ दिखे थे.

Prithvi Vallabh 1943

Sony TV की सिरियल पृथ्वी वल्लभ

सोनी टीवी ने बड़े ही धूमधामसे इस सीरियल का निर्माण किया और हमें बड़े ही VFX इस सीरियल में देखने को मिले. इस सीरियल को दो पर्वो में दिखाया जायेगा. “इतिहास भी, रहस्य भी” इस शीर्षक के साथ इस सीरियल को दिखाया जा रहा हे.

Prithvi Vallabh Serial

सोनी टीवी के अनुसार इस सीरियल में इतिहास के साथ एक Cinematic Libarty ली गई हे और कहानी में कई काल्पनिक घटनाये और पात्र होंगे जो KM Munshi के किताबसे परे होंगे. इस सीरियल में दिखने वाले किरदार इस तरह हे.

  • आशीष शर्मा – पृथ्वी वल्लभ
  • सोनारिका भादुरिया – मृणालिनी
  • इशिता गांगुली – अमरुषा
  • जतिन गुलाटी – तैलप
  • शालिनी कपूर – पृथ्वी वल्लभ की माँ
  • मुकेश रूशी – सेनाध्यक्ष कलारी
  • सुनील कुमार पलवल – सिन्धुराज
  • पवन चोपड़ा – राजा सिन्ह्दात्ता

हमने लिखा लेख पूरी तरह इतिहास पर आधारित हे. यहाँ इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी हे. पृथ्वी वल्लभ कि कहाणी को कन्हयालाल मुन्शी कि किताब कि वजह से जाणा जाता हे. पर कन्हयालालजी ने अपने उपन्यास मे तैलप को पूर्व चालुक्य का यांनी तेलंगण का राजा बताया हे. जबकी वे पश्चिमी चालुक्य यांनी गुजरात के राजा थे.. भिल्लम को तैलप का सेनापती बताया गया पर वो देवगिरी के यादव राजा थे.

Mythak

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