Home / Mahabharat / किसने जलाया था लाक्षागृह ? वर्नाव्रत कि सच्चाई ! Reality Of Varnavrata

किसने जलाया था लाक्षागृह ? वर्नाव्रत कि सच्चाई ! Reality Of Varnavrata

इतिहास कि एक फितरत होती हे, वो विजेताओ कि तरफ झुका हुवा होता हे या साफ शब्दोमे कहे तो इतिहास हमेशा विजेताओ द्वारा लिखा..बताया जाता हे… और इसीकरण ऐसी अनेको कहानिया रह जाती हे जो या तो अनेको को पता नही होती… या फिर उन्हे इस प्रकारसे बताया जाता हे कि …विजेताओ कि प्रतिष्ठा पर आंच न आये.

पर धर्म का वैसा नही होता वो हमेशासेही न्याय करता आया हे… वो सही कर्मो के फल तो दुष्कर्मो कि सजा देता हे… आज के लेखमे हम बात करेंगे महाभारत कि एक ऐसीही कहाणी की, वन्राव्रत कि कहाणी और इस्की सच्चाई के बारे मे.

“नमस्कार मित्रो स्वागत हे आपका मिथक टीवी कि official website मे अगर आपको हमारे विडीयो पसंद हे तो हमे पढते रहे.”

हम सभी लोग जाणते हे कि, सत्तासंघर्ष के कारण पांडवो को वर्नाव्रतमे जलाने कि दुर्योधन कि योजना थी पर संपूर्ण कहाणी जानबुचकर हमे बतायी नही जाती. वन्राव्रत मे दुर्योधन के षडयंत्र का कोई भी समर्थन कर नही सकता… हम भी नही

विदुरद्वारा दुर्योधनका भांडाफोड ! (Vidura Exposed Duryodhana’s Plan)

पर दुर्योधन के षडयंत्र(lakshagruha Burning Plan) के बारे मे विदुर ने म्लेच्छ भाषा में पांडवो को एक सन्देश भेजा, जिसमे दुर्योधन के षड्यंत्र का भांडाफोड़ कर दिया था.. और पांडवो को इस बारे में पहले ही सावधान कर दिया था, और सही मायनो मे तभी दुर्योधन का षड्यंत्र विफल हो गया. पर जिसवक्त दुर्योधन का षड्यंत्र समाप्त हो गया उस वक्त युदिष्ठिर का षड्यंत्र शुरू हो गया. सन्देश पढने के बाद युदिष्ठिर ने अपने भाइयो को अपने पास बुलाके इस बारे में बता दिया. उसने कहा की वे पुरोचन को जिन्दा जला देंगे, और उसी वक्त वो अपनी जगह ६ और लोगो को जिन्दा जला देंगे..

आदिपर्व के १३६ वे अध्याय

निषाद युवको कि आहुती (Pandava Killed Nishada)

मौके की तलाश में युदिष्ठिर इंतजार करने लगा, इस बिच एक साल बीत गया. एक दिन राजमाता कुंती ने भोजन का आयोजन किया और आसपास के सभी लोगो को आमंत्रित किया. एक निषाद औरत अपने पांच बच्चो के साथ वहा आ जाती हे, गरीबी के कारन ये लोग कई दिनों से भूके थे. और युदिष्ठिर जिस मौके की तलाश साल भरसे कर रहा था, वो उसे एक साल बाद मिल जाता हे. राजमाता कुंती उन्हें बड़े ही आग्रह से भोजन के लिए बिठाती हे… पर वो उनके भोजन में नशीली चीज मिला देती हे. नशे के कारन सभी निषाद मुर्छित हो जाते हे.

तब हर पांडव एक निषाद को अपने कक्ष में सुला देते हे तो निषाद औरत को कुंती के कक्ष में सुला दिया जाता हे. अब भीम लाक्षागृह को आग लगा देता हे, पुरोचन सहित सभी निषाद इस आग में जिन्दा जलकर मारे जाते हे. पांडव विदुर को एक सन्देश भेजते हे जिसके बाद विदुरने अपने मंत्री से कहकर निषादो कि लाशो को दबा दिया ताकि कोई पांडवो कि पहचान न कर सके. हस्तिनापुर की जनता की यही समझ होती हे की पांडव मारे गए और दुर्योधन ही अपने बंधूद्वेष के कारन इसका कारन होगा. इस कहानी के साथ ही अनेको प्रश्न मन में उपस्थित हो जाते हे.

varnavrata nishada murder

दुर्योधन के षड्यंत्र के बाद भी एक साल… जो एक एक काफी बड़ा वक्त होता हे पांडव उसी लाक्षागृहमे रहे, क्या इस वक्त में लाक्षागृह में रहकर पांडवो ने बहोत बड़ा risk नही लिया था..?? क्या वे वहासे निकल नही सकते थे ? और क्या मासूम निषादों की बली देना जरुरी था ??

या फिर ये विदुर और पांडवो ने मिलकर खेला एक राजनीतिक दांव था..? (Reality Of Varnavrata)

अगर राजनितिक दृष्टीसे देखा जाय तो लाक्षागृह की घटना ने हस्तिनापुर की जनता मे दुर्योधन को एक खलनायक बना दिया… सारी प्रजा उसे एक ऐसे भाई के रुपमे मे देखणे लगी जिसने अपनेही भाइयो को जिन्दा जला दिया था….
इससे पहले दुर्योधन एक लोकप्रिय राजकुमार था… एक अच्छे शासन के साथ भारत ने कोनो कोनो मे उसने अनेको मंदिरो का निर्माण करवाया था …कोई भी राजा अपनी प्रजा की सहानभूति के बिना राज नही कर सकता हे…

बहोतसे लोगो को पता नही होगा कि, लाक्षागृह मे निषादो को जलाने का षडयंत्र करणेवाली राजमाता कुंती कि मृत्यू कैसे हुई…. ठीक उसी तरह जलकर जिसतरह निषाद स्त्री जलकर मरी थी…कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद राजमाता कुंती कि जंगल मे लगी आग मे जलकर मृत्यू हुई थी. जिस तरह निषाद युवक निंदमेही मृत्यू को प्राप्त हुये उसी तरह पांडवपुत्र भी निंद मेही मारे गये…

महाभारत हमे सत्य और असत्य, धर्म और अधर्म कि माया मे उलझाता हे और यही महाभारत कि विशेषता हे… तो आप क्या सोचते हे इस बारे में कमेन्ट में जरुर बताये 

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