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1979 China Vietnam War :- जब विएतनाम मे हारणा पडा चीन को !!

क्या चीन को हराया नही जा सकता ?? क्या माओ(Mao tse tung) के चीन को आजतक किसीने धूल नही चखायी ???  

१९६७ मी हुये भारत-चीन युद्ध (India China Battle 1967) पर हमने एक लेख लिखा था, इस लेख पर बने युट्युब एपिसोड को आपने काफी प्यार दिया ये एपिसोड को आपने इतना सराहा कि कूछ चीनियो को इसपर “हेट कमेंट्स” देणे पडे. पर हमे सबसे निराशा तब आई …. जब हमारे कूच भारतीय भायियो और बहनो ने “भारत चीन को कभी नही हरा सकता” इस तरह कि निराशाजनक कमेंट्स करे थे.  

युद्धशास्त्र के कूच साधारण नियम (Simple Rules of Strategic Warfare)

क्या सिर्फ सेना और संसाधनो से युद्ध जिता जा सकता हे ?? अगर ऐसा होता तो अमरिका को विएतनाम मे हारणा नही पडता और अफगाणिस्तान मे लंबे समय तक उलझना नाही पडता. अफगाणिस्तान और विएतनाम के संसाधन और सेना कि क्या आप अमरिका कि सेना से तुलना कर सकते हे ??? चीन के प्राचीन सेनानी सन-त-झु ने शतको पहले “आर्ट ऑफ़ वॉर(Art Of War)” नाम कि एक किताब लिखी थी. ये किताब आज भी रणनीती कि एक best-seller किताब मानी जाती हे. इस किताब की माने तो सेना की संख्या और संसाधनों से नेतृत्व, रणनीति, युद्ध की जगह की भौगोलिक स्थिति कई जादा माईने रखती हे. अगर आप अच्छी खासी ऊंचाई पर हे तो आपके सो सैनिक हजार विरोधी सैनिको पर भारी पड सकते हे.और लड़ाईया सेना और संसाधनों की बजाय रणनीति, हौसला और भूगोल की बेहतरीन जानकारी इन बातो से जीती जाती हे इसी बात का जिते जागते उदाहरण हे “अमेरिका-विएतनाम युद्ध” और “चीन-विएतनाम युद्ध”!! हमने “अमरिका-कोरिया युद्ध” के बारे मी पहले हि लेख लिखा हे. पर आज हम विएतनाम और चीन युद्ध के बारे मे बात करेंगे. 

कम्बोडिया प्रश्न (Combodia and Pol Pot)

बात १९७८ कि हे, कंबोडिया मी खमेर राजघराणे का राज पोल पोट के हाथो मे था, पोल पोट ज्ञात इतिहास के १० सबसे खुंखार शासको मेसे एक हे. उसने लाखो लोगो को महज ३ साल के अपने कार्यकाल मे मार डाला. सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि साथही पडोसी विएतनाम से भी उसका काफी झगडा था.इस भयानक इन्सान को अमेरिका और चीन कि खुली छुट थी. मानवता का तथाकथित रक्षक अमरिका और कथित तौर पर साम्यवाद यांनी आम इंसानो का शासन करनेवाला चीन इस कत्लेआम का जाहीर तौर पर समर्थन कर रहे थे. 

Indo China Map

  पर वाही वियतनाम कम्बोडियन हुकुमशाह के काम से त्रस्त था. कम्बोडियासे प्रताड़ित निर्वासित अब वियतनाम आने लगे थे. सच्चे साम्यवादी हो-ची-मिन्ह के सिद्धान्तो पर चलने वाले विएतनाम को ये सहन नही हुवा, क्योकी पडोसी मुल्क मे लगी आग कि लपटे… अब विएतनाम तक पुहचने लगी थी. 

वियतनाम की कम्बोडिया जित (Vietnam’s Cambodian Invasion)

१९७९ मे विएतनाम ने कंबोडिया जिसका तबका नाम काम्पुचिया था पर आक्रमण कर दिया. इस युद्ध में खुद कंबोडिया के लोगो ने खमेर शासन को खत्म करणे मी विएतनाम कि मदत कि, और कुछ तो वियतनाम की तरफ से लडे. विएतनाम कि सेना ने खमेर शासन को खत्म कर एक नया शासन शुरू किया.

China Vietnam war Hindi

पर जैसा की हम जानते हे पडोसी देश का महत्त्व जागतिक पटल पर बढ़ना इसे चीन अपना महत्त्व कम होना मानता हे. कंबोडिया कि जीत से विएतनाम का महत्व इंडो-चायना मे काफी बढ चुका था. साम्यवाद कि पटल पर एक नया तारा उग चुका था. और अब हो-ची-मिन्ह, फिडेल केस्ट्रो, चे गुवेरो, मार्शल टिटो और लेनिन जैसे महान साम्यवादी नेताओ मे शामिल हो चुके थे. चीन को ये अपने प्रभुत्व को एक चुनोती लगी. 

चीन वियतनाम युद्ध (China Vietnam War)

अमरिका तो ६ साल पहले विएतनाम युद्ध मे हार का मु देख चुका था, और न हि अब उसमे इतना साहस था कि वो फिर से एक नया विएतनाम युद्ध शुरू कर सके… तब समकालीन दुनिया कि तिसरी सबसे ताकदवर सेना ने जिसे हमारे बहोतसे मित्र अजेय समझते हे, चीन ने विएतनाम पर हमला बोल दिया.

  पर युद्ध सिर्फ सेना के बल पर नही जिता जा सकता, रणनीती, भौगोलिक रचना कि जानकारी और सबसे बढकर लोगो का हौसला ये युद्ध जितने के लिये उतनेही जरुरी होते हे जितनी सेना.साल था १९७९ माओ का चीन अब डेंग का चीन बन चुका था, और economic reforms कि निव डाल रहा था. चीन को ये डर था कि शायद सोवियत रशिया विएतनाम कि मदत करेगा. इसलिये चीन ने रननीतिक चाल चली “चीन-सोवियत सहयोग संधी” को रद्द कर दिया और साथ हि बहोत बडी सेना रशियन सीमा पर खडी कर दिया. १७ फेब्रुअरी के दिन ६ लाख चीनी उत्तरी विएतनाम पर टूट पडे, विएतनाम के पास कुल मिलाकर ७०,००० कि फौज थी और उसमे से भी बहोत सी फौज कंबोडिया मे तैनात थी. विएतनाम युद्ध मे अमरिका के छुटे हुये हठीयारो से लेस ये फौज अत्याधुनी अवजारो और अमरीकी धन से लेस चीनियो का मुकाबला कर रही थी. विएतनाम ने अपनी सारी फौज बिजली कि गती से उत्तरी विएतनाम मे भेज दि. 

Vietnam China Border clashes

 १७ फरवरी को चीनियो द्वारा हमला किया गया, वे महज १५ से २० किलोमीटर ही अंदर घुसे होंगे कि विएतनाम कि गुरील्ला warfare ने उनके हमले को क्षीण कर दिया. चीन-विएतनाम का सीमावर्ती शहर लांग सोन मे, गलीयो-गलियों, घर-घर के कब्जे के लिए लडाई हुयी …. १७ फरवरी को कुछ ही दिनों के अन्दर वियतनाम जितने निकली चीनी सेना को सिर्फ लांग सोन जितने में एक महिना लग गया जो चीनी सीमा से महज २५ किलोमीटर दूर हे.विएतनाम ने अमरीका के बाद अब चीन को भी मजा चखा दिया था, विएतनाम जितना तो दूर पर कम्बोडिया में फिरसे खमेर शासक को बिठाना भी चीन के लिए नामुनकिन था.चीन को अपने आप को दूसरा अमरीका नही बनाना था, और न ही दशको तक विएतनाम में अपनी सेना को मरने देना था. ७ मार्च को चीन ने अपनी सेना को वापस ले लिया. पर जिस तरह चीन हमेशा करता हे उस तरह अपने मुर्ख नागरिको के सामने उसने इस पराजय को विजय कहके पेश किया.  

युद्ध का एक साधारण नियम हे “जब आक्रामक अपने लक्ष को पाने में असफल हो जाय, या जिसपर आक्रमण हुवा हे वो अपनेआप का बचाव करने में सफल हो जाए तो, यक़ीनन तौर पर ये आक्रामक की हार होती हे”

 चीन-विएतनाम युद्ध में चीन को वियतनाम को जितना था और कम्बोडिया पर फिरसे कब्ज़ा जमाकर खमेर शासक को अपने पपेट के तौर पर फिरसे राजपर बिठाना था. पर कम्बोडिया पर विएतनाम का कब्ज़ा १९८९ यानी युद्ध के १० साल बाद तक रहा हे, ये साबित करता हे की चीन अपना एक भी उद्देश अंशतः पाने में भी असफल रहा था…तो विएतनामी लोगो ने अपने देश को बचाए रख्खा था, अगर ये युद्ध वो लम्बा खिचता तोभी चीन के हाथ हार के सिवा कुछ नहीं लगता और अमरिका कि ही तरह हारणा पडता. 

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