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Barbarik (बार्बारिक) – Warrior With 3 Arrow

Barbarik / बार्बारिक – महाभारत युद्ध को ३ तिरो से खत्म करपाने वाला योद्धा !
महाभारत के युद्ध से पहले भगवान कृष्ण ने कौरव और पांडव दोनो पक्षो के महान योद्धाओ कि समीक्षा कि थी. tab भगवान कृष्ण ने पाया कि भीष्म पितामहा महाभारत युद्ध को २० दिनो मे अकेले के बलबुते पर खत्म कर सकते हे, गुरु द्रोन २५ दिनों में, कर्ण २४ दिनों में तो श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन २८ दिनों मेंही अकेले महाभारत युद्ध को समाप्त कर सकता था, पर एक योद्धा था जो महाभारत युद्ध को सिर्फ तिन तिरोसे ख़त्म कर सकता था

पितामहा भीष्म कुरुक्षेत्र के युद्ध को 20 दिनो मे जित सकते थे. द्रोणाचार्य 25 दिनों में, महारथी कर्ण 24 दिनों में तो धनुर्धारी अर्जुन 28 दिनों में इस युद्ध को जित सकता था !

भीमपुत्र बार्बारिक (Barbarik)- दुर्बलो कि औरसे लडणेवाला ! 

कुरुक्षेत्र युद्ध के काफी साल पहले, एक जंगल में एक बालक अपनी माता के साथ अभ्यास कर रहा था. अत्यंत ही होशियार ऐसे इस नन्हे बालक ने अपनी माता से पूछा “माँ !! जीवन का सर्वोत्तम उपयोग क्या हे” इस प्रश्न पर उसकी माँ ने कहा “किसी दुर्बल की सहायता करना परमोधर्म हे, और यही जीवन का सबसे सर्वोत्तम उपयोग हे

उस नन्हे बालक के दिमाग ये बात बैठ गई. इस बालक अपनी माँ को वचन दिया की वो हमेशा ही दुर्बल का साथ देगा. जंगल में अभ्यास करने वाला हे नन्हा बालक था, बार्बारिक…!!! महान पांडव भीमसेन का पोता. भीम पुत्र घटोत्कच और मौरवि का पुत्र और साथही एक महान योद्धा था.  जिसकी महान माता ने उसे बचपन में जो सिख दी उसी का पालन उसने अंत तक किया.

कोण कितने दिनो मे कुरुक्षेत्र युद्ध खत्म कर सकता था?

महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण पांडवो के और कौरवो के शक्ती का अनुमान लगा रहे थे. तब उन्होंने एक ब्राह्मण वेश धारण किया और वे हर एक योद्धा कि काबिलियत का जायजा लेणे लगे. पितामह भीष्म ने उन्हें बताया की वे अकेले महाभारत युद्ध को केवल २० दिनों में ख़त्म कर सकते हे. तो भगवन कृष्ण के अनुमान के अनुसार गुरु द्रोणाचार्य २५ दिनों में, दानवीर कर्ण ने २४ दिनों में तो गांडीवधारी अर्जुन २८ दिनों में इस युद्ध को अकेले ख़त्म करने की काबिलियत रखते थे. पर इसी दौरान भगवान कृष्ण ने एक ऐसे योद्धा को पाया जो अपने सिर्फ 3 तिरो से इस सम्पूर्ण युद्ध को समाप्त कर सकता था.

Barbarik Story

कौरवो की सेना जो बड़ी थी … फिर बार्बरीक हारते हुए पक्ष के साथ कैसे ??  

यक़ीनन कौरवो की सेना पांडवो के मुकाबले बड़ी थी साथ ही कौरवो के पास कई बलशाली योद्धा, रथी, महारथी थे. पर जैसा की हमने हमारे आधुनिक युद्हो की सीरिज में बताया हे की सेना, संसाधन से कई गुना ज्यादा रननीती महत्वपूर्ण होती.

उदहारण के तौर पर अमरीका के सैनिक संख्या की गिनती में चीन या फिर हमारे प्यारे देश भारत से काफी कम हे. पर संसाधन और रणनीतिक साधन इसे आज दुनिया की सर्वोत्तम सेना बनाते हे.

संसार का सबसे बड़ा रननीतिकार कृष्ण पांडवो के साथ था और इस चीज को बार्बारिक भलीभाती जानता था. बार्बरिक ये बात भलीभाती जानता था की अगर संख्या की बात की जाय तो कौरव अधिक हे. पर पितामहा भीष्म, द्रोणाचार्य, शल्य जैसे योद्धा सिर्फ मजबूरी में कौरवो के पक्ष में लड़ रहे हे, और उनकी मनही मन इच्छा हे की पांडवो की जय हो. इसके विपरीत हर पांडव योद्धा उत्साह से भरा पड़ा हे और अपने पक्ष के विजय के लिए जो चाहे कर पड़ेगा.

कौरवो की औरसे लडनेवाला और उन्हें जिताने के लिए पूरा पक्ष लगाने वाला सिर्फ महारथी कर्ण था ! पर कर्ण को भी भगवान कृष्ण ने अपनी रणनीतिक सूजबुझ के चलते माता कुंती के जरिये वचन में बांध लिया था.

भगवान कृष्ण के पांडवो के पक्ष में रहने से पांडवो का पलड़ा युद्ध में भारी था, और शायद इसीलिए बार्बारिकने दुर्बल पक्ष यानी कौरवो के और से युद्ध में उतरने की ठानी थी.

Furious Barbarik

बर्बरिक (Barbarik) के तीन दिव्य-बाण

भगवान कृष्ण के लिए बार्बरिक एक बड़ी समस्या था, अगर बार्बरिक युद्ध में उतरता तो वो कौरवो को जीता देता. भगवान कृष्ण ने इसकारण ब्राह्मण वेश धारण किया और वे बार्बरिकसे मिले. जब केशव बर्बरीक से मिले तो वे आश्चर्य में दंग रह गए.

बर्बरीक से ब्राह्मणवेशी केशव ने पूछने पर उसने कहा की “वो मात्र कुछ लम्हों में और सिर्फ तिन बानो की सहायता से युद्ध को ख़त्म कर सकता हे”.

बार्बरिक की तपस्या की कहानी

बार्बरीक ने महिसागर क्षेत्र में घोर तपश्चर्या की थी . इस तपस्या से प्रसन्न होकर माँ जगदम्बा ने उसे ३ बाण दिए. ये तीनो बाण दिव्य थे और महान काबिलियत रखते थे. पहले बाण से वो उस क्षेत्र/या वस्तुओ पर निशाना लगा सकता था जिनका वो विनाश करना चाहता हे, दुसरा बाण से निशाना लगाकर वो उन चीजो को मार्क कर देता जिन्हे वो बचाना चाहता हे और तीसरा बाण दुसरे बाण द्वारा mark कीगई चीजो को छोड़ कर सभी चीजो का विनाश कर देता था.

बार्बरिक अपने पहले बाण से एक बड़े क्षेत्र पर निशाना लगता, दुसरे से जिन चीजो को वो नष्ट नहीं करना चाहता उनपर निशाना लगाता, और तीसरे बाणसे अन्य सभी को नष्ट कर देता

यानि बार्बरिक पहले तीर से सम्पूर्ण कुरुक्षेत्र पर निशाना लगाता. दुसरे तीर से कौरव सेना पर निशाना लगाता (जिसे वो बचाना चाहता था). और तीसरे तीर से सम्पूर्ण पांडव सेना का विनाश कर देता. और ये सब कुछ पलो में हो जाता

भगवान कृष्ण को पहले तो उसपर भरोसा नही हुवा और उन्होंने बर्बरीक की परीक्षा लेने का विचार किया, उन्होंने बार्बारिक से सामने वाले पेड़ की सभी पत्तो को छेदने के लिए कहा, साथ ही उन्होंने बर्बरिक को पता चले बगैर एक पत्ते को हलके से तोड़ कर अपने पैरो के निचे छिपा दिया. बर्बरीक ने जब पहला बाण छोड़ा तब पेड़ के सारे पत्तो को mark करने के बाद… तीर भगवान् कृष्ण के पैर को चीरने लगा तब भगवान् कृष्ण ने अपना पैर उठाया और फिर तीर ने उस छुपाये हुये पत्ते को भी mark कर लिया. फिर बर्बरीक ने तीसरा तीर छोड़ा जिसने सभी पत्तो को छेद दिया जिसमे भगवान् कृष्ण के पैरो के निचे दबा पत्ता भी शामिल था.

अन्य लोककथाओ के अनुसार बार्बरिक के भेदे जाने की वजह से भगवान कृष्ण के पैर का वो बिंदु भेदनेलायक हुआ था. जिसे अंत में जरा नामक शिकारी ने गलती से भेदा था, और भगवान् कृष्ण की मृत्यु की वजह बना था

Barbarik in Hindi

भगवान कृष्ण कि कुटनीती

भगवान कृष्ण के बात समझ मी आई कि अगर बर्बरीक युद्ध में शामिल होता हे तो ..युद्ध का निर्णय पांडवो के विपरीत लगना तय था… इस कारन ब्राम्हण वेशधारी कृष्ण ने बर्बरीकसे दान की अभिलाषा व्यक्त की… बर्बरीक ने भी उन्हें दान का वचन दिया, तब भगवान कृष्ण ने उससे शीश का दान माँगा, वचन मी बंधे महान वीर बर्बरीक ने ये मान भी लिया पर साथ ही उसने भगवान् कृष्ण से ये याचना की “के वो युद्ध को अंत तक देखना चाहता हे अता वे उसके कटे सर को युद्ध समाप्ति के बाद दफनाये”महान वीर बर्बरीक अगर महाभारत युद्ध में भाग लेते तो शायद युद्ध कुछ ही क्षणों में समाप्त हो जाता. 

Ghatushyam

बार्बारिक ही बने भगवान कृष्ण कि मृत्यू का कारण?

हमे कुछ कहानिया ऐसी मिली जीनमें कहा गया की जब भगवान् कृष्ण बर्बरीक की परीक्षा ले रहे थे, और पेड़ की पत्ते पर खड़े थे, तब बर्बरीक के प्रथम बाण ने उस पत्ते पर निशाना लगाने के लिए भगवान् कृष्ण के पैर को जख्मी किया था, और बादमें वही weak spot पर तीर लगने से भगवान्कृष्ण का अंत हुवा. आपको Barbarik (बार्बारिक) – महाभारत युद्ध को ३ तिरो से खत्म कर सकने वाला योद्धा कि कथा कैसी लगी कमेंट करके बताना.

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