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अमीर होकर भी गरीब कैसे तिरुपती बालाजी | Tirupati Balaji Story in Hindi

विश्व के सबसे अमीर तीर्थस्थलो मेसे एक !! तिरुपती देवस्थान

अमीर होकार भी गरीब कैसे हे तिरुपती बालाजी (Tirupati Balaji Story)- वेंकटेश्वर अवतार कि कहाणी(Lord Venkateswara Story)| तिरुपती बालाजी जो भारत का सबसे संपन्न भगवान हे, और अगर दुनिया की संपत्ति की बात करी जाए तो क्रिस्चियन धर्मस्थल Vatican City के बाद में दुनिया का सबसे आमिर धर्मस्थल हे.

आज हम आपको भगवान् विष्णु के बालाजी अवतार (Venkateshwara) की कथा सुनाने जा रहे.

अगर धन के आधार पर देखा जाए तो वर्तमान में सबसे धनवान भगवान बालाजी(Lord Balaji) हैं। एक विश्वसनीय आंकड़े के अनुसार बालाजी मंद‌िर ट्रस्ट के पास 50 हजार करोड़ से अध‌िक की संपत्त‌ि है। लेक‌िन इतने धनवान होने के बाद भी बालाजी सभी देवताओं से गरीब ही हैं. आप सोच रहे होंगे क‌ि इतना पैसा होने पर भी कैसे गरीब हो सकता हैं। और दूसरा सवाल यह क‌ि जो सबकी मनोकामना पूरी करता है वह खुद कैसे गरीब हो सकता है।

भगवान वेंकटेश्वर कहाणी [Tirupati Balaji Story]

कहानी तब शुरू होती हे जब कलियुग की मात्र शुरवात ही हुयी थी, पवित्र गंगा नदी के तटपर कश्यप ऋषि(Sage Kashyapa) के नेतृत्व में सभी ऋषि एक महान यग्य का आयोजन करते हे, उस समय नारदमुनी(sage Narada) और महर्षि भ्रिगु(sage Bhrigu) वहा आते. नारदमुनि सभी ऋषियो से पूछते हे की आपने कलियुग में किस देवता को संतुष्ट करने के लिए, इस यज्ञ का आयोजन किया गया हे… तब सभी ऋषि किस देवता को यज्ञ का प्रमुख देवता बनाये ये चुनने का कार्य महर्षि भ्रिगु को देते हे.

महर्षी भ्रिगु तब ब्रह्मलोक जाते हे. ब्रह्मलोक में भगवान ब्रह्मा वेदों का पठन कर थे. ब्रह्मा महर्षि भृगुपर ध्यान नही देते नाराज होकर महर्षि भृगु कैलाश जाते हे. वहा भगवान महादेव माता पार्वती के संग समय बिता रहे थे. अपने आराम काल में व्यत्यय के कारन महादेव भृगु पर कोपित हो जाते हे.

ब्रह्मलोक और कैलाश के बाद महर्ष‌ि भृगु बैकुंठ जाते हे पर भगवान विष्णु(Lord Vishnu) तब सोये हुए थे, महर्षि भ्रिगु को ये उनका अपमान लगता हे और उन्होंने गुस्से से शैय्या पर लेटे भगवान व‌िष्‍णु की छाती पर एक लात मारी. भगवान व‌िष्‍णु ने तुरंत जागे और उन्होंने महर्षि भृगु के चरण पकड़ ल‌िए और पूछा की “ऋष‌िवर कही पैर में चोट तो नहीं लगी” भगवान व‌िष्‍णु की विनयशीलता देख महर्षि भृगु ऋष‌ि ने दोनों हाथ जोड़ ल‌िए और कहा की प्रभु आप ही सबसे सहनशील देवता हैं इसल‌िए यज्ञ भाग के प्रमुख अध‌िकारी आप ही हैं.

महर्षि भृगु के इस उद्दंड व्यव्हार के कारन देवी लक्ष्मी(Goddess Laxmi) कोपित हो जाती हे. माता लक्ष्मी को भृगु ऋष‌ि का यह व्यवहार पसंद नहीं आया और वह भगवान व‌िष्‍णु से और ज्यादा नाराज हो गई, क्योकि उन्होंने महर्षि भृगु को दण्डित न करते हुए सम्मानित किया था.

विष्णू का बालाजी अवतार(Lord Vishnu’s Balaji Incarnation)

भगवान विष्णु से नाराजगी में देवी लक्ष्मी बैकुंठ छोड़कर पृथ्वी चली आई. भगवान व‌िष्‍णु ने देवी लक्ष्मी को ढूंढना शुरु क‌िया, तो पता चला क‌ि देवी ने पृथ्‍वी पर पद्मावती(Padmavati) नाम की कन्या के रुप में जन्म ल‌िया है। भगवान व‌िष्‍णु ने भी तब पृथ्वीलोक पर श्रीनिवास(Shrinivas Venkateshwara) नाम से अवतार धारण किया.

भगवान विष्णु ने वेंकट पर्वत पर पुष्किरिणी के नजदीक एक इमली के पेड़ के निचे जन्, लिया. भगवान शिव और ब्रह्मा भी गाय और बछड़े के रुपमे पृथ्वीलोक में प्रकट हुए. वेंकट पर्वत पर चरने के लिए जाने वाली गाय हमेशा भगवान के पास जाती और अपने दूधसे उनका पोषण करती.

ये गाय चोला घराने की गयो मेसे थी, जब चरवाहे को पता चलता हे की ये गाय कभी दूध नही देती. उसने इसका कारन जानने की कोशिश करी. जब उसे बात कर पता चला तो उसने इस गाय को मारने की कोशिश की. तब भगवान वेंकटेश्वर ने उस वार को अपने ऊपर लिया और गाय को बचा लिया. पर भगवान पर वार करनेवाला चरवाहा भगवान के तेज के कारन वही मर गया.

रात्रि को गाय अपने शिबिर में लौटी भगवान के रक्त की खून की छींटे गाय के शरीर पर पड़ी थी. इस कारन चोला राजाने अगले दिन गाय का पीछा किया. राजा ने देखा की चरवाहा बिना किसी घाव के मरा पड़ा हे. जब उसे सम्पूर्ण प्रकरण का पता चला तब उसने भगवान का बड़ा सम्मान किया और पद्मावती के साथ विवाह के लिए पूछा.

पद्मावती से व‌िवाह का प्रस्ताव श्रीनिवास ने रखा ज‌िसे देवी पद्मावती ने स्वीकार कर ल‌िया। लेक‌िन प्रश्न सामने यह आया क‌ि व‌िवाह के ल‌िए धन कहां से आएगा। व‌िष्‍णु जी ने समस्या का समाधान न‌िकालने के ल‌िए भगवान श‌िव और ब्रह्मा जी को साक्षी रखकर कुबेर(Lord Kubera) से काफी धन कर्ज ल‌िया। इस कर्ज से भगवान व‌िष्‍णु के वेंकटेश रुप और देवी लक्ष्मी के अंश पद्मवती ने व‌िवाह क‌िया।

अमीर होकर भी गरीब कैसे हे तिरुपती बालाजी?? [Rich Still Poor Tirupati Balaji]

कुबेर से कर्ज लेते समय भगवान(Tirupati Balaji) ने वचन द‌िया था क‌ि कल‌ियुग के अंत तक वह अपना सारा कर्ज चुका देंगे। कर्ज समाप्त होने तक वह सूद चुकाते रहेंगे। भगवान के कर्ज में डूबे होने की इस मान्यता के कारण बड़ी मात्रा में भक्त धन-दौलत भेंट करते हैं ताक‌ि भगवान कर्ज मुक्त हो जाएं। भक्तों से म‌िले दान की बदौलत आज यह मंद‌िर करीब 50 हजार करोड़ की संपत्त‌ि का माल‌िक बन चुका है। पर शास्‍त्रों के अनुसार कर्ज में डूबे व्यक्त‌ि के पास क‌ितना भी धन हो वह गरीब ही होता है। इस न‌ियम के अनुसार यह माना जाता है क‌ि बालाजी धनवान होकर भी गरीब हैं पुरानो के अनुसार कल‌ियुग के अंत तक वे कर्ज में रहेंगे। बालाजी के ऊपर जो कर्ज है उसी कर्ज को चुकाने के ल‌िए यहां भक्त सोना और बहुमूल्य धातु एवं धन दान करते हैं।

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