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नागपाश – इंद्रजीत का भयानक अस्त्र

एक ऐसा अस्त्र जिसका कोई तोड़ नहीं था, जिसे पहली और आखरी बार जब चलाया गया तो उसने भगवान् श्रीराम और लक्ष्मण को बंधित कर दिया था.

नमस्कार मित्रो स्वागत हे आपका मिथक टीवी में हम धन्यवाद करना चाहेंगे हमारे सभी दर्शको का जिन्होंने हमे काफी प्यार दिया… आज mythological weapons शृंखला में हम बात करेंगे नागपाश की.

  हिन्दू पुरानो के वर्णनो के अनुसार जब भी नागपाश अपने लक्ष को भेदता हे तो, लाखो-हजारो जहरीले सांप लक्ष को बाँध देते हे. और उनकी चपेट में आने वाला मूर्छित होकर धीरे धीरे मृत्यु को प्राप्त कर लेता हे. नागपाश और नागास्त्र में काफी फर्क हे, और नागास्र के मुकाबले नागपाश काफी घातक और विनाशकारी हे. साधारण तौर जैसे ब्रम्हास्त्र को सबसे विध्वंसकारी Nuclear Weapon कहा जाता हे उसी तरह से हम नागपाश को हम महाभयंकर Biological Weapon कह सकते हे.  तुलनात्मक दृष्टि से देखे तो नागास्त्र लाखो जहरीले सापो की वर्षा करता था, आम तौर पर ये अस्र काफी योध्याओ को पता था और साथ ही इसका तोड़ भी था. गरुडास्र के उपयोग से इसे निरस्त किया जा सकता था. रामायण युद्ध में रावण के चलाये नागास्त्र को प्रभु राम ने गरुडास्त्र का उपयोग कर निरस्त्र किया था. तो महाभारत युद्ध में अर्जुन और कर्ण दोनों ने इस अस्त्र का उपयोग किया था. पर नागपाश का कोई तोड़ नहीं था.

        हम जब नागपाश के बारे में जानने की कोशिश करते हे. तो हमें पता चलता हे की इन्द्रजीत की पत्नी सुलोचना सांपो के राजा दक्ष की बेटी थी. और इसीकारण इन्द्रजीत की पुहँच दुनिया के महाभयानक सांपो तक थी. इन्ही विशिष्ट महाभयानक सांपो के बिज से उसने नागपाश का निर्माण किया था. नागपाश का उपयोग इन्द्रजीत के सिवा कभी किसीने नहीं किया, और शायद इन्द्रजीत की मृत्यु के साथ इस अस्र की जानकारी भी समाप्त हो जाती हे.   लंका की और से अगर किसी एक का नाम सर्वश्रेष्ट योद्धा कहकर लिया जा सकता था, तो वो था इन्द्रजीत. इन्द्रजीत को ब्रम्हदंड, पाशुपतास्त्र के साथ सेकड़ो दैवी अस्त्र पता थे. युद्धभूमि पर वो अपने पिता रावण से कई गुना ज्यादा खतरनाक था.   रामायण युद्ध में जब इन्द्रजीत जब युद्धभूमि पर आता हे तो वो हजारो वानरों का संहार करने लगता हे, तब प्रभु राम और लक्ष्मण उसके सामने युद्ध करने हेतु उतर जाते हे. दोनों और से घमासान युद्ध शुरू होता हे. इन्द्रजीत के हर बाण का जवाब प्रभु राम और लक्ष्मण के पास होता हे तो प्रभु राम और लक्ष्मण के हर बाण का तोड़ इन्द्रजीत के पास. शायद इन्द्रजीत उस दिन अपने पराक्रम के चरम पर था, दोनों महाप्रतापी योद्धा प्रभु राम और लक्ष्मण मिलकर भी उसके हरा नहीं पा रहे होते.
हर अस्र का जवाब किसी दुसरे अस्र से दिया जा रहा था, कोई भी हारने को या पीछे हटने को तैयार नही था तब उस हालत में इन्द्रजीत नागपाश का उपयोग करता हे. ऊपर से साधारण दिखने वाले इस बाण को प्रभु राम भांप नहीं पाते और मेघनाद का ये अस्त्र प्रभु राम और लक्ष्मण को जकड लेता हे.

जब कोई भी इस अस्र का तोड़ नहीं निकाल पाता तब भगवान् श्रीराम की मुक्ति के लिए खुद भगवान् गरुड़ को अपने परिजनों को भेजना पड़ता हे.

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